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26 अप्रैल 2010

Love (SMS)

(1) Fasle mita kar aapas me pyar rakhna,
Dosti ka ye rishta hamesha yunhi barkarar rakhna,
Bichad jaye kabhi aap se hum,
Aankhon me hamesha hamara intejar rakhna.

(2) Kisi na kisi pe kisi ko aetbar ho jata hai,
Ajnabi koi shaks yaar ho jata hai,
Khubiyo se nahi hoti mohabbat bhi sadaa,
Khamiyo se bhi aksar pyaar ho jata hai.

(3) Khuda se thoda rahem kharid lete,
Aap ke zakhmo ka marhar kharid lete,
Agar kahin kabhi bikti khushiyan meri,
To saari bechkar aapka har gam kharid lete.

(4) Gam ki aahat na aaye tere dar par,
Pyar ke samander ka tum bhi ek kinara ho,
Bhool se jo tapke teri aankhon say moti,
Thame wohi jo tumhe sabse pyara ho.

(5) Mohabbat me sath to harpal hota he,
Koi dikhne se hota he to koi dilse hota hai,
Maza to sath tab aye yaro,
Jab judai ka lamha mahsus hota hai

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Love (SMS)

(1) Zindagi hai nadan isiliye chup hoon,
Dard hi dard subah shaam isiliye chup hoon,
Keh du zamane se dastan apni,
Usme aayega tera naam isiliye chup hoon.

(2) Hoth keh nahi sakte jo fasana dil ka,
Shayad nazron se vo baat ho jaye,
Is ummid se karte hain intezar raat ka,
Ke shayad sapne me mulakat ho jaye.

(3) Sehmi si nigaho mein khwab hum jaga denge,
Sooni in raho pe phool hum khila denge,
Humare sang muskura ke to dekhiye,
Hum aapke har gum bhula denge.

(4) Kaise kehde ki unse milne ki chahat nahi,
Bekarar dil ko ab bhi rahat nahi,
Bhula dete unhe bhi magar kya kare dost,
Kisi ko bhulane ki is dil ko aadat nahi.

(5) Mana aaj unhe hamara koi khayal nahi,
Jawab dene ko hum razi he par koi sawal nahi,
Pucho unke dil se kya hum unke yaar nahi,
Kya hamse milne ko wo bekarar nahi.

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Love (SMS)

(1) Mohabbat ko mohabbat ka ishara yaad rehata hai,
Har pyar ko apna pyar yaad rehta hai,
Wo pal jo yaar ki baho me guzarta hai,
Maut tak vo nazara yaad rehta hai.

(2) Panchi keh rahe hai ki hum chaman chod denge,
Aur sitare keh rahe hai ki hum gagan chod denge,
Agar tere ishq mein mai mar bhi jau ae sanam,
Tum dilse pukar lena hum kafan chod denge.

(3) Aansu aa jate hain aankhon mein,
Par labon pe hasi lani padti hai,
Yeh mohabbat bhi kya cheez hai yaaro,
Jisse karte ho usi se chupani padti hai.

(4) Aap ka ashiyana dil mein basaya hai,
Apki yado ko sine se lagaya hai,
Pata nahi yaad apki hi kyo aati hai,
Dost to hamne auro ko bhi banaya hai.

(5) Dosti gazal hai gane ke liye,
Dosti nagma hai sunane ke liye,
Ye wo jazba hai jo sabko nahi milta,
Kyonki aap jaisa chahiye nibhane ke liye.

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Love (SMS)

(1) Lahar aati hai kinare se palat jati hai,
Yad ati hai dil me simat jati hai,
Faraq itna hai ki lehar bewaqt ati hai,
Aur aap ki yaad har waqt ati hai.

(2) Nazre na hoti to nazara na hota,
Duniya main hasino ka guzara na hota,
Hamse yeh mat kaho ke dil lagana chhod de,
Jaake khuda se kaho hasino ko banana chhod de.

(3) Leke hum dusro ki hasi kya kare,
Jo apni nahi wo khushi kya kare,
Tanha jine se behatar hai mar jaye hum,
Jab saath tum nahi to zindagi jikar kya kare.

(4) Phool bankar muskurana zindagi hai,
Muskurake gum bhulana zindagi hai,
Milkar log khush hote hai to kya hua,
Bina mile dosti nibhana bhi zindagi hai.

(5) Tumhari yaadon ki mehek in hawaon mein hai,
Pyar hi pyar hi bikhra in fizao mein hai,
Aisa na ho ki duriya dard ban jaye,
Ab to aapke msg ka intezaar niaghon mein hai.

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Love (SMS)

(1) Har khushi dil ke karib nahi hoti,
Zindagi gamo se dur nahi hoti,
Ae dost is dosti ko sanjokar rakhna,
Aisee dosti har kisi ko nasib nahi hoti.

(2) Hum mitti ka aashiyana banate gaye,
Bana bana kar unhe mitate gaye,
Hume koi na apna bana saka,
Hum har kisi ko apna banate gaye.

(3) Kaun hai jo manzil se door nahin,
Kaun hai jo zindagi se majboor nahin,
Gunaah to sabhi karte hain,
Humari nazar mein to khuda bhi bekasoor nahin.

(4) Kab unki palkon se izhaar hoga,
Dil ke kisi kone mein hamare liye pyar hoga,
Guzar rahi hai raat unki yaad mein,
Kabhi to unko bhi hamara intezar hoga.

(5) Lamhe ye sunhere kal sath ho na ho,
Kal me aaj jaisi baat ho na ho,
Yaadon ke hasin lamhe dil me rehenge,
Tamaam umar chahe mulaqat ho na ho.

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5 अप्रैल 2010

Hindi Shayari - हिंदी शायरी - (भाग - 35)

(1) हर वक्त मुस्कुराना फिदरत हैं हमारी !
आप यूँ ही खुश रहे हसरत हैं हमारी !!
आपको हम याद आये या ना आये !
आपको याद करना आदत हैं हमारी !!

(2) हम वो नहीं की भूल जाया करते हैं !
हम वो नहीं जो निभाया करते हैं !!
दूर रहकर मिलना सायद मुस्किल हो !
पर याद करके सांसो में बस जाया करते हैं !!

(3) रात गुमसुम हैं मगर चाँद खामोश नहीं !
कैसे कह दूँ फिर आज मुझे होश नहीं !!
ऐसे डूबा तेरी आँखों के गहराई में आज !
हाथ में जाम हैं,मगर पिने का होश नहीं !!

(4) दिन तेरे ख़याल में गुजर जाता हैं !
रातों को भी ख़याल तेरा ही आता हैं !!
कभी ये ख़याल इस तरह बढ़ जाता है की !
आयने में भी तेरा ही चेहरा नज़र आता हैं !!

(5) आंसू से पलके भींगा लेता था !
याद तेरी आती थी तो रो लेता था !!
सोचा था की भुला दूँ तुझको मगर !
हर बार ये फैसला बदल लेता था !!

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Hindi Shayari - हिंदी शायरी - (भाग - 34)

(1) उनकी तस्वीर को सिने से लगा लेते हैं !
इस तरह जुदाई का गम मिटा देते हैं !!
किसी तरह कभी उनका जिक्र हो जाये तो !
भींगी पलकों को हम झुका लेते हैं !!

(2) दोस्त कह कर दोस्त से दगा कर बैठा !
वो आज एक ऐसा खता कर बैठा !!
कहता था तुझे कभी हम खपा ना होने देगे !
आज वो खुद ही हमें खपा कर बैठा !!
आदत थी उसे सबोके गमो को दूर करने की लेकिन !
हमारे लिए ही वो गमो की दुआ कर बैठा !!

(3) हर बार मुझे जख्म ए दिल ना दिया कर !
तू मेरी नहीं तो मुझे दिखाई ना दिया कर !!
सच-झूठ तेरी आँखों से हो जाता हैं जाहिर !
क़समें ना खा, इतनी सफाई ना दिया कर !!

(4) उनका हाल भी कुछ आप जैसा ही होगा !
आपका हाले दिल उन्हें भी महसूस होगा !!
बेकरारी के आग में जो जल रहे हैं आप !
आपसे ज्यादा उन्हें इस जलन का एहसास होगा !!

(5) एय मेरी जिन्दगी यूँ मुझसे दगा ना कर !
उसे भुला कर जिन्दा रहू दुआ ना कर !!
कोई उसे देखता हैं तो होती हैं तकलीफ !
एय हवा तू भी उसे छुवा ना कर .... !!

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Hindi Shayari - हिंदी शायरी - (भाग - 33)

(1) दिल में इंतजार की लकीर छोर जायेगे॥
आँखों में यादो की नमी छोर जायेगे !
ढूंढ़ते फिरोगे हमें एक दिन ........
जिन्दगी में एक दोस्त की कमी छोर जायेगे !!

(2) जिंदगी के रंग कितने निराले हैं !
साथ देने वाला हर कोई है लेकिन हम अकेले हैं !!
पानी है मंजिल हमें मगर रास्तों में रुकावटे हैं !
खुशियों में सब साथ हैं, गमों में सब पराये हैं!!

(3) हर कोई साथ हो ये जरुरी नहीं होता !
जगह तो दिल में बनायीं जाती हैं !!
पास होकर भी दोस्ती इतनी अटूट नहीं होती !
जितनी की दूर रह कर निभाई जाती हैं !!

(4) हम तो यु ही बेखुदी में कह दिए !
की हमें कोई याद नहीं करते !!
जिसका हो आप जैसा प्यारा दोस्त!
वो कभी खुदा से भी फरियाद नहीं करते !!

(5) वो वक्त वो लम्हे अजीब होंगे !
दुनियाँ में हम खुश नशीब होंगे !!
दूर से जब इतना याद करते हैं आपको !
क्या हाल होगा जब आप हमारे करीब होगे !!

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Hindi Shayari - हिंदी शायरी - (भाग - 32)

(1) जिसे दिल दिया वो दिल्ली चली गई !
जिसे प्यार किया वो इटली चली गई !!
दिल ने कहा खुद ख़ुशी कर ले जालिम !
बिजली को हाथ लगाया तो बिजली चली गई !!

(2) तुझसे मिलने की बेताबी का वो अंजाम कैसे भुलादूँ !
तेरे लवो की हँसी और आँखों की जाम कैसे भुलादूँ !!
दिल तो हमारा भी तड़पता हैं तेरा साथ पाने को !
पर इस जहाँ के रश्मो - रिवाज कैसे भुलादूँ !!

(3) चिराग खुशियों के कब से बुझाए बैठे हैं !
कब दीदार होगी उनसे हम आश लगाए बैठे हैं !!
हमें मौत आएगी उनकी ही बाहों में ......
हम मौत से ये सर्त लगाए बैठे हैं !!

(4) आंसू से पलके भींगा लेता था !
याद तेरी आती थी तो रो लेता था !!
सोचा था की भुला दूँ तुझको मगर !
हर बार ये फैसला बदल लेता था !!

(5) रात को रात का तोफा नहीं देते !
दिल को जजबात का तोफा नहीं देते !!
देने को तो हम आप को चाँद भी दे दे !
मगर चाँद को चाँद का तोफा नहीं देते !!

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चाँदनी को क्या हुआ...

चाँदनी को क्या हुआ कि आग बरसाने लगी
झुरमुटों को छोड़कर चिड़िया कहीं जाने लगी

पेड़ अब सहमे हुए हैं देखकर कुल्हाड़ियाँ
आज तो छाया भी उनकी डर से घबराने लगी

जिस नदी के तीर पर बैठा किए थे हम कभी
उस नदी की हर लहर अब तो सितम ढाने लगी

वादियों में जान का ख़तरा बढ़ा जब से बहुत
अब तो वहाँ पुरवाई भी जाने से कतराने लगी

जिस जगह चौपाल सजती थी अंधेरा है वहाँ
इसलिए कि मौत बनकर रात जो आने लगी

जिस जगह कभी किलकारियों का था हुजूम
आज देखो उस जगह भी मुर्दनी छाने लगी

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जो पत्थर तुमने मारा...

जो पत्थर तुमने मारा था मुझे नादान की तरह
उसी पत्थर को पूजा है किसी भगवान की तरह

तुम्हारी इन उँगलियों की छुअन मौजूद है उस पर
उसे महसूस करता हूँ किसी अहसान की तरह

उसी पत्थर में मिलती है तुम्हारी हर झलक मुझको
उसी से बात करता हूँ किसी इनसान की तरह

कभी जब डूबता हूँ मैं उदासी के समंदर में
तुम्हारी याद आती है किसी तूफ़ान की तरह

मेरी किस्मत में है दोस्त तुम्हारे हाथ का पत्थर
भूल जाना नहीं मुझे किसी अंजान की तरह

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गीत है दिल की सदा..

गीत है दिल की सदा हर गीत गाने के लिए
गुनगुनाने के लिए सबको सुनाने के लिए

ज़ख़्म रहता है कहीं और टीस उठती है कहीं
दिल मचलता है तभी कुछ दर्द गाने के लिए

फूल की पत्ती से नाज़ुक गीत पर मत फेंकिए
बेसुरे शब्दों के पत्थर आज़माने के लिए

गीत के हर बोल में हर शब्द में हर छंद में
प्यार का पैग़ाम हो मरहम लगाने के लिए

फूल खिलते हैं वफ़ा के तो महकती है फ़ज़ा
हुस्न ढलता है सुरों में गुनगुनाने के लिए

आज के इस दौर में ‘जितू’ किसी को क्या कहे
गीत लिखना चाहिए दिल से सुनाने के लिए

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दूर तक जिसकी नज़र..

दूर तक जिसकी नज़र चुपचाप जाती ही नहीं

हम समझते हैं समीक्षा उसको आती ही नहीं

आपका पिंजरा है दाना आपका तो क्या हुआ
आपके कहने से चिड़िया गुनगुनाती ही नहीं

भावना खो जाती है शब्दों के जंगल में जहाँ
शायरी की रोशनी उस ओर जाती ही नहीं

आप कहते हैं वफ़ा करते नहीं हैं इसलिए
जिस नज़र में है वफ़ा वह रास आती ही नहीं

झाड़ियों में आप उलझे तो उलझकर रह गए
आप तक बादे सबा जाकर भी जाती ही नहीं

शेर की दोस्तों अभी भी शेरीयत है ज़िंदगी
इसके बिना कोई ग़ज़ल तो गुदगुदाती ही नहीं

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उसने जो चाहा था...

उसने जो चाहा था मुझे इस ख़ामुशी के बीच
मुझको किनारा मिल गया उस बेखुदी के बीच

घर में लगी जो आग तो लपटों के दरमियां
मुझको उजाला मिल गया उस तीरगी के बीच

उसकी निगाहेनाज़ को समझा तो यों लगा
कलियाँ हज़ार खिल गईं उस बेबसी के बीच

मेरे हजा़र ग़म जो थे उसके भी इसलिए
उसने हँसाकर हँस दिया उस नाखुशी के बीच

मेरी वफ़ा की राह में उँगली जो उठ गई
दूरी दीवार बन गई इस ज़िंदगी के बीच

दुनिया खफ़ा है आज भी तो क्या हुआ
उसका ही रंगो नूर है इस शायरी के बीच

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बेमुरव्वत है मगर...

बेमुरव्वत है मगर दिलबर है वो मेरे लिए
हीरे जैसा कीमती पत्थर है वो मेरे लिए

हर दफा उठकर झुकी उसकी नज़र तो यों लगा
प्यार के पैग़ाम का मंज़र है वो मेरे लिए

आईना उसने मेरा दरका दिया तो क्या हुआ
चाहतों का खूबसूरत घर है वो मेरे लिए

एक लम्हे के लिए खुदको भुलाया तो लगा
इस अंधेरी रात में रहबर है वो मेरे लिए

उसने तो मुझको जलाने की कसम खाई मगर
चिलचिलाती धूप में तरुवर है वो मेरे लिए

जिस्म छलनी कर दिया लेकिन मुझे लगता रहा
ज़िंदगी भर की दुआ का दर है वो मेरे लिए

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यादों ने आज फिर..

यादों ने आज फिर मेरा दामन भिगो दिया
दिल का कुसूर था मगर आँखों ने रो दिया

मुझको नसीब था कभी सोहबत का सिलसिला
लेकिन मेरा नसीब कि उसको भी खो दिया

उनकी निगाह की कभी बारिश जो हो गई
मन में जमी जो मैल थी उसको भी धो दिया

गुल की तलाश में कभी गुलशन में जब गया
खुशबू ने मेरे पाँव में काँटा चुभो दिया

सोचा कि नाव है तो फिर मँझधार कुछ नहीं
लेकिन समय की मार ने मुझको डुबो दिया

दोस्तों वफ़ा के नाम पर अरमाँ जो लुट गए
मुझको सुकून है मगर लोगों ने रो दिया

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सितम जिसने किया..

सितम जिसने किया मुझ पर उसे अपना बनाया है
तभी तो ऐसा लगता है कि वो मेरा ही साया है

उदासी के अँधेरों ने जहाँ रस्ता मेरा रोका
तबस्सुम के चरागों ने मुझे रस्ता दिखाया है

कभी जब दिल की बस्ती में चली जज़्बात की आँधी
उसी आँधी के झोंकों ने ग़ज़ल कहना सिखाया है

भले दुनिया समझती है इसे दीवानगी मेरी
इसी दीवानगी ने तो मुझे शायर बनाया है

इसी दुनिया में बसती है जो रंगो नूर की दुनिया
नज़र आएगी क्या उसको जो घर में भी पराया है

मुझे इस लोक से मतलब नहीं उस लोक से दोस्तों
मुझे उस नूर से मतलब जो इस दिल में समाया है

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हर सितम हर ज़ुल्म..

हर सितम हर ज़ुल्म जिसका आज तक सहते रहे
हम उसी के वास्ते हर दिन दुआ करते रहे

दिल के हाथों आज भी मजबूर हैं तो क्या हुआ
मुश्किलों के दौर में हम हौसला रखते रहे

बादलों की बेवफ़ाई से हमें अब क्या गिला
हम पसीने से ज़मीं आबाद जो करते रहे

हमको अपने आप पर इतना भरोसा था कि हम
चैन खोकर भी हमेशा चैन से रहते रहे

चाँद सूरज को भी हमसे रश्क होता था कभी
इसलिए कि हम उजाला हर तरफ़ करते रहे

हमने दुनिया को बताया था वफ़ा क्या चीज़ है
आज जब पूछा गया तो आसमाँ तकते रहे

हम तो पत्थर हैं नहीं फिर पिघलते क्यों नहीं
भावनाओं की नदी में आज तक बहते रहे

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उजड़े हुए चमन का...

उजड़े हुए चमन का, मैं तो बाशिंदा हूँ
कोई साथ है तो लगता है, मैं भी अभी ज़िंदा हूँ

ज़िंदगी अब लगती है, बस इक सूनापन
जब से बिछडे हुए हैं, तुमसे हम
जान अब तो तेरे लिए ही, बस मैं ज़िंदा हूँ

ज़िंदगी के सफ़र में, तेरे साथ हैं हम
मैंने सोचा है बस, बस तेरे हैं हम
होके तुमसे जुदा, मैं कैसे कहूँ ज़िंदा हूँ

यार अब तो तेरे ही, सपने देखते हैं हम
ख़्वाब में कहते हो मुझसे, कि तेरे हैं हम
कुछ मजबूरी है सनम, जो मैं शर्मिंदा हूँ

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कहने को तो..

कहने को तो हम, खुश अब भी हैं
हम तुम्हारे तब भी थे, हम तुम्हारे अब भी हैं

रूठने-मनाने के इस खेल में, हार गए हैं हम
हम तो रूठे तब ही थे, आप तो रूठे अब भी हैं

मेरी ख़ता बस इतनी है, तुम्हारा साथ चाहता हूँ
तब तो पास होके दूर थे, और दूरियाँ अब भी हैं

मुझसे रूठ के दूर हो, पर एहसास तो करो
प्यासे हम तब भी थे, प्यासे हम अब भी हैं

इस इंतज़ार में मेरा क्या होगा, तुम फिक्र मत करना
सुकून से हम तब भी थे, सुकून से हम अब भी हैं

बस थोड़ा रूठने के अंजाम से डरते हैं
डरते हम तब भी थे, डरते हम अब भी हैं

हमारी तमन्ना कुछ ज़्यादा नहीं थी, जो पूरी न होती
कम में गुज़ारा तब भी था, कम में गुज़ारते अब भी हैं

चलते हैं तीर दिल पे कितने, जब तुम रूठ जाते हो
ज़ख्मी हम तब भी थे, ज़ख्मी हम अब भी हैं

मेरी मासूमियत को तुम, ख़ता समझ बैठे हो
मासूम हम तब भी थे, मासूम हम अब भी हैं

आप हमसे रूठा न करें, बस यही इल्तिजा है
फ़रियादी हम तब भी थे, फ़रियादी हम अब भी हैं

तुम हो किस हाल में, कम से कम ये तो बता दो
बेखब़र हम तब भी थे, बेखब़र हम अब भी हैं

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पेड़ की छाँव में..

पेड़ की छाँव में, बैठे-बैठे सो गए
तुमने मुसकुरा कर देखा, हम तेरे हो गए

तमन्ना जागी दिल में, तुम्हें पाने की
तुम्हें पा लिया, और खुद तेरे हो गए

कब तलक यों ही, दूर रहना पड़ेगा
इस सोच में डूबे-डूबे, दुबले हो गए

बिन पत्तों की, उस डाली को देखा
तसव्वुर किया तुम्हारा, और कवि हो गए

यों ही बैठे रहे, सोचते रहे, हर पल
ख़यालों में तुम आते रहे, हमनशीं हो गए

राज़दार मेरे बनकर, ज़िंदगी में आ गए
रहनुमा बन गए, खुद राज़ हो गए

कोई फूल देखूँ, तो लगता है तुम हो
फिर फूल का क्या करूँ, खुद फूल हो गए

नसीब की कमी है, गुलाब सहता नहीं
पर तुम्हीं ख़यालों में, इक हँसी गुलाब हो गए

बेकरारी बढ़ती है, जब तुम याद आते हो
याद मैं करता नहीं, फिर भी याद आ गए

तुम्हारे लिए है, ये ज़िंदगी मेरी
ख़्वाहिश में तुम्हारी, हम लाचार हो गए

तड़प-तड़प के, एक-एक पल, मुश्किल से बीतते हैं
एक पल बीता, ऐसा लगे, कई साल हो गए

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तुम जो साथ हमारे होते..

तुम जो साथ हमारे होते
कितने हाथ हमारे होते

दूर पहुँच से होते जो भी
बिल्कुल पास हमारे होते

माफ़ सज़ाएँ होती रहतीं
कितने जुर्म हमारे होते

बँटती समझ बराबर सबको
ऐसे न बँटवारे होते

रार नहीं तकरार नहीं तो
कितने ख़्वाब सुनहरे होते

काजल से होती यारी तो
नैना ये कजरारे होते

कदम मिला कर हमसे चलते
तुम भी अपने प्यारे होते

मिर्च मसाले न होते तो
ऐसे न चटखारे होते

पैदा न मोबाइल होता
दुखी खूब हरकारे होते

सौदे न सरकारी होते
कैसे नोट डकारे होते

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मुद्दत के बाद मोम की...

मुद्दत के बाद मोम की मूरत में ढल गया
मेरी वफ़ा की आँच में पत्थर पिघल गया

उसका सरापा हुस्न जो देखा तो यों लगा
जैसे अमा की रात में चंदा निकल गया

ख़ुशबू जो उसके हुस्न की गुज़री क़रीब से
मन भी मचल गया मेरा तन भी मचल गया

गुज़रे हुए लम्हात को भुलूँ तो किस तरह
यादों में रात ढल गई सूरज निकल गया

मIना उसी के नूर से रोशन है ज़िंदगी
उसका तसव्वुर ही मेरे शेरों में ढल गया

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उदासी के समंदर को...

उदासी के समंदर को छुपाकर मन में रख लेना
किसी की बद्दुआओं को दुआ के धन में रख लेना

हज़ारों लोग मिलते हैं मगर क्या फ़र्क पड़ता है
निगाहों को जो भा जाए उसे दरपन में रख लेना

मुहब्बत रोग है दुनिया समझती है समझने दो
कलेजे से लगाकर तुम उसे धड़कन में रख लेना

पड़ोसी से छुपा लेना हँसी अपनी खुशी अपनी
नहीं तो पाँव खींचेगा इसी से मन में रख लेना

किसी भी बात पर तुमसे खफ़ा जब चाँद हो जाए
जलाकर एक नन्हा-सा दीया आँगन में रख लेना

वफ़ा की राह में ‘जितू’ ज़माना आग जब उगले
दुआओं की तरह उस आग को दामन में रख लेना

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मुझे पिला के...

मुझे पिला के ज़रा-सा क्या गया कोई
मेरे नसीब को आकर जगा गया कोई

मेरे क़रीब से होकर गुज़र गई दुनिया
मेरी निगाह में लेकिन समा गया कोई

मेरी गली की हवाओं को क्या हुआ आख़िर
दर-ओ-दीवार को दुश्मन बना गया कोई

मेरे हिसाब में ज़ख़्मों का कोई हिसाब नहीं
मेरे हिसाब को आकर मिटा गया कोई

मेरी वफ़ा ने तो चाहा कि चुप रहूँ लेकिन
ज़रा-सी बात पर मुझको रुला गया कोई

ग़मों के दौर में दोस्त मेरी खुशी के लिए
किसी मज़ार पर चादर चढ़ा गया कोई

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अगरचे मोहब्बत..

अगरचे मोहब्बत जो धोखा रही है
तो क्यों शमा इसकी हमेशा जली है

हमारे दिलों को वही अच्छे लगते
कि जिनके दिलों में मुहब्बत बसी है

मोहब्बत का दुश्मन ज़माना है लेकिन
सभी के दिलों में ये फूली फली है

बिठाते थे सबको ज़मीं पर जो ज़ालिम
वो हस्ती भी देखो ज़मीं में दबी है

सभी कीमतें आसमाँ चढ़ रहीं जब
तो इंसां की कीमत ज़मीं पे गिरी है

हो सच्ची लगन और इरादे जवाँ हों
तो मंज़िल हमेशा कदम पर झुकी है

ज़माने की चाहा था सूरत बदलना
मगर अपनी सूरत बदलनी पड़ी है

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जिनके दिल में...

जिनके दिल में गुबार रहते हैं
यार वो बादाख़्वार रहते हैं

कि जहाँ ओहदेदार रहते हैं
लोग उनके शिकार रहते हैं

पढ़ते लिखने में जो भी अव्वल थे
अब तो वो भी बेकार रहते हैं

मशवरा उनको कभी देना न
जो ज़हन से बीमार रहते हैं

किसी दौलत के ग़ार में देखो
वहाँ खुदगर्ज़ यार रहतै हैं

आजकल जिनके पास दौलत है
हुस्न के तल्बगार रहते हैं

किसी दफ़्तर के बड़े हाकिम ही
ऐश में गिरिफ़्तार रहते हैं

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ये दुनिया इस तरह..

ये दुनिया इस तरह क़ाबिल हुई है
कि अब इंसानियत ग़ाफ़िल हुई है

सहम कर चाँद बैठा आसमाँ में
फ़ज़ा तारों तलक क़ातिल हुई है

खुदाया, माफ़ कर दे उस गुनह को
लहर जिस पाप की साहिल हुई है

बड़ी हसरत से दौलत देखते हैं
जिन्हें दौलत नहीं हासिल हुई है

जहाँ पर गर्द खाली उड़ रही हो
वहाँ गुर्बत की ही महफ़िल हुई है

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ज़िंदगी अभिशाप भी...

ज़िंदगी अभिशाप भी, वरदान भी
ज़िंदगी दुख में पला अरमान भी
कर्ज़ साँसों का चुकाती जा रही
ज़िंदगी है मौत पर अहसान भी

वे जिन्हें सर पर उठाया वक्त ने
भावना की अनसुनी आवाज़ थे
बादलों में घर बसाने के लिए
चंद तिनके ले उड़े परवाज़ थे
दब गए इतिहास के पन्नों तले
तितलियों के पंख, नन्हीं जान भी

कौन करता याद अब उस दौर को
जब ग़रीबी भी कटी आराम से
गर्दिशों की मार को सहते हुए
लोग रिश्ता जोड़ बैठे राम से
राजसुख से प्रिय जिन्हें वनवास था
किस तरह के थे यहाँ इंसान भी।

आज सब कुछ है मगर हासिल नहीं
हर थकन के बाद मीठी नींद अब
हर कदम पर बोलियों की बेड़ियाँ
ज़िंदगी घुडदौड़ की मानिंद अब
आँख में आँसू नहीं काजल नहीं
होठ पर दिखती न वह मुस्कान भी।

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दूर तक निगाह में..

दूर तक निगाह में खामोशियाँ हैं
सामने गुलाब है पर वो जाने कहाँ हैं

गुलाब की खुशबू गुलाब-सी रंगत
है जिनके पास वो जाने कहाँ हैं

ख़्वाबों में आते हैं जो ख़्वाब बनकर
मैं ढूँढूँ उन्हें पर वो जाने कहाँ हैं

मेरे ख़्वाब उनकी ही गलियों में खोये
हम जिनमें खोये वो जाने कहाँ हैं
दूर तक निगाह में. . .

चमन में हैं फूल उनमें हूँ मैं भी
मगर जो हैं माली वो जाने कहाँ हैं

उनके संदेशे का है इंतज़ार
जो हैं डाकिए वो जाने कहाँ हैं

उठती हैं नज़रें क्यों राहों की जानिब
मेरा हमसफर तो न जाने कहाँ हैं

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3 अप्रैल 2010

Hindi Shayari - हिंदी शायरी - (भाग - 31)

(1) काश वादों का मतलब वो समझते !
काश खामौसी का मतलब वो समझते !!
नज़र कहती हैं हजार बातें !
काश मेरे एक नज़र का मतलब वो समझते !!


(2) फिर करने लगा हिसाब जिंदगी का !
ये भी एक जरिया हैं तुम्हे याद करने का !!
यादों के खाख में ढूंढ़ रहा था एक हँसी !
आँखों से भी टपका तो एक कतरा .... !!


(3) तेरे होठों से लग कर ये हवा शराब बन गई !
आँखों से लग कर ये हिजाब बन गई !!
सच ही कहती हैं ये दूनियाँ जानेमन !
की मुझ से मिलकर तू लाजबाब हो गई !!


(4) बड़ा अरमान था तेरे संग जिंदगी बिताने का !
शिकवा हैं बस तेरे खामोश रह जाने का !!
दीवानगी इस से बढ़ा के क्या होगी !
मुझे आज भी इंतजार हैं तेरे आने का !!
 
 
(5) हर आहट एहसास हमारा दिलाएगी !
हर हवा खिसा हमारा सुनाएगी !!
हम इतने यादें भर देगे आपके दिल में !
ना चाहते हुवे भी आपको याद हमारी आएगी !!

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Hindi Shayari - हिंदी शायरी - (भाग - 30)

(1) दोस्ती तो सिर्फ एक इत्तफाक हैं !
यह तो दिलो की मुलाक़ात हैं !!
दोस्ती नहीं देखती यह दिन हैं की रात हैं !
इसमें तो सिर्फ वफादारी और जज्बात हैं !!


(2) तुम्हे हमारी याद कभी तो आती होगी !
दिल की धड़कन भी सायद बढ़ जाती होगी !!
कितना चाहा था हमने की साथ - साथ रहे !
यह सोच कर तुम्हारी भी आँख भर आती होगी !!


(3) प्यार करने वालो की किस्मत ख़राब होती हैं !
हर वक़्त इन्तहा की घड़ी साथ होती हैं !!
वक़्त मिले तो रिश्तो की किताब खोल के देखना !
दोस्ती हर रिश्तो से लाजवाब होती हैं !!


(4) आँखों में आंसुओ को उभरने ना दिया !
मिट्टी के मोतियों को बिखरने ना दिया !!
जिस राह पे पड़े थे तेरे कदमो के निशान !
उस राह से किसी को गुजरने ना दिया !!
 
 
(5) मोहब्बत के बिना ज़िन्दगी फिजूल हैं !
पर मोहब्बत के भी अपने उसूल हैं !!
कहते हैं मिलती हैं मोहब्बत में बहुत उल्फ़ते !
पर आप हो महबूब तो सब कबूल हैं !!

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Hindi Shayari - हिंदी शायरी - (भाग - 29)

(1) कसूर ना उनका हैं ना मेरा !
हम दोनों ही रिश्तों की रस्में निभाते रहे !!
वो दोस्ती का एहसास जताते रहे !
हम मोहब्बत को दिल में छुपाते रहे !!


(2) नाकाम सी कोशिस किया करते हैं !
हम हैं की उनसे प्यार किया करते हैं !!
खुदा ने तक़दीर में टुटा तारा भी नहीं लिखा !
और हम हैं की चाँद की आरजू किया करते हैं !!


(3) एक अजनबी से मुझे इतना प्यार क्यों हैं !
इनकार करने पर भी चाहत का इकरार क्यों हैं !!
उसे पाना नहीं हैं मेरी तक़दीर में सायद !
फिर भी हर मोड़ पर उसका इंतजार क्यों हैं !!


(4) मांग कर तुझे रव से पाया नहीं हमने !
कौन सा वो ख्वाब हैं जो पलकों में सजाया नहीं हमने !
तुम तो भुलोगी मुझे मालूम हैं ये जाने - जाना !
मगर एक लम्हा भी कभी तुझको भुलाया नहीं हम ने !!


(5) तुम मेरी वफाओ को सदा याद करोगी !
खुद को मेरे याद में बर्बाद करोगी !!
मेरे प्यार को तुम जानो या न जानो !
तुम मुझे याद मेरे बाद करोगी !!

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आंशु भर आते है..

आंशु भर आते है आँखों में हर एक हशी के बाद !
गम बन गया नशीब मेरा हर ख़ुशी के बाद !!

निकला था कारवा मोहब्बत की राह में !
हर मोर पे नफरत खरी थी हर गली के बाद !!

सोचा था प्यार का मैं संजोउगा गुलशन !
हर फूल जल गया मेरा बनकर कलि के बाद !!

चाहत की बेबसी का ये कैसा हैं इम्तिहान !
दिल ने ना सकू पाया कभी दिल लगाने के बाद !!

अब राख़ ही समेटता हूँ आशियाने की !
खुद ही जला दी थी जिसे आजादी के बाद !!

सुनते है बाद मरने के मिलता है सब सिला !
देखेगे क्या मिलेगा मुझे जिन्दगी के बाद !!

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लहू से ♥ पे जो...

लहू से ♥ पे जो खीचा था नक्शा कैसे मिटादु !
तू ही बता मैं तुझको अपने ♥ से कैसे भुलादु !!

मेरे हस्ती को तो बस आस थी तेरे वजूद की !
मेरे हस्ती का जो हशी है उसे कैसे भुला दु !!

मेरे तनहाई में जो साथ मेरा छोर न पाया !
सब से फुरसत का जो हशी है उसे कैसे भुलादु !!

जिनकी तलाश में मेरा जीवन गुजर गया !
उस दोस्त को पाकर उसे कैसे भुला दु !!

वही तो याद थी सदा वही याद है सदा !
जो याद रहेगी सदा उसे कैसे भुला दु !!

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न जाने चाँद पूनम...

न जाने चाँद पूनम का, ये क्या जादू चलाता है
कि पागल हो रही लहरें, समुंदर कसमसाता है

हमारी हर कहानी में, तुम्हारा नाम आता है
ये सबको कैसे समझाएँ कि तुमसे कैसा नाता है

ज़रा सी परवरिश भी चाहिए, हर एक रिश्ते को
अगर सींचा नहीं जाए तो पौधा सूख जाता है

ये मेरे और ग़म के बीच में क़िस्सा है बरसों से
मै उसको आज़माता हूँ, वो मुझको आज़माता है

जिसे चींटी से लेकर चाँद सूरज सब सिखाया था
वही बेटा बड़ा होकर, सबक़ मुझको पढ़ाता है

नहीं है बेईमानी गर ये बादल की तो फिर क्या है
मरुस्थल छोड़कर, जाने कहाँ पानी गिराता है

पता अनजान के किरदार का भी पल में चलता है
कि लहजा गुफ्तगू का भेद सारे खोल जाता है

ख़ुदा का खेल ये अब तक नहीं समझे कि वो हमको
बनाकर क्यों मिटाता है, मिटाकर क्यूँ बनाता है

वो बरसों बाद आकर कह गया फिर जल्दी आने को
पता माँ-बाप को भी है, वो कितनी जल्दी आता है

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कोई आँसू बहाता है..

कोई आँसू बहाता है, कोई खुशियाँ मनाता है
ये सारा खेल उसका है, वही सब को नचाता है।

बहुत से ख़्वाब लेकर के, वो आया इस शहर में था
मगर दो जून की रोटी, बमुश्किल ही जुटाता है।

घड़ी संकट की हो या फिर कोई मुश्किल बला भी हो
ये मन भी खूब है, रह रह के, उम्मीदें बँधाता है।

मेरी दुनिया में है कुछ इस तरह से उसका आना भी
घटा सावन की या खुशबू का झोंका जैसे आता है।

बहे कोई हवा पर उसने जो सीखा बुज़ुर्गों से
उन्हीं रस्मों रिवाजों, को अभी तक वो निभाता है।

किसी को ताज मिलता है, किसी को मौत मिलती है
ये देखें, प्यार में, मेरा मुकद्दर क्या दिखाता है।

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नदिया- नदिया...

नदिया- नदिया, सागर- सागर
पनघट- पनघट, गागर- गागर
मेरी प्यास भटकती दर- दर

भटकन की कैसी मजबूरी
भीतर है अपनी कस्तूरी
संगम- संगम, तीरथ- तीरथ
मन्दिर- मन्दिर, देव- देव घर
मेरी आस भटकती दर- दर

खोज रहा मन गंध सुहानी
युगों- युगों की यही कहानी
उपवन- उपवन, चन्दन- चन्दन
सावन- सावन ,जलधर- जलधर
मेरी सांस भटकती दर- दर

यह कैसा अनजाना भ्रम है
धरा- गगन जैसा संगम है
संत- संत पर, पंथ- पंथ पर
मरघट- मरघट, सुधा कुंड पर
मेरी लाश भटकती दर- दर

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ये ख़ास दिन है...

ये ख़ास दिन है प्रेमियों का,
प्यार की बातें करो
कुछ तुम कहो कुछ वो कहें,
इज़हार की बातें करो

जब दो दिलों की धड़कनें
इक गीत-सा गाने लगें
आँखों में आँखें डाल कर
इक़रार की बातें करो

ये कीमती-सा हार जो
लाए हो वो रख दो कहीं
बाहें गले में डाल कर,
इस हार की बातें करो

जिसके लबों की मुस्कुराहट
ने बदल दी ज़िंदगी
उस गुलबदन के होंट औ
रुखसार की बातें करो

अब भूल जाओ हर जफ़ा,
ये प्यार का दस्तूर है
राहे-मुहब्बत में वफ़ा-ए-
यार की बातें करो

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जब भी होता है तेरा...

जब भी होता है तेरा जिक्र कहीं बातों में
लगे जुगनू से चमकते हैं सियाह रातों में

खूब हालात के सूरज ने तपाया मुझको
चैन पाया है तेरी याद की बरसातों में

रूबरू होके हक़ीक़त से मिलाओ आँखें
खो ना जाना कहीं जज़्बात की बारातों में

झूठ के सर पे कभी ताज सजाकर देखो
सच ओ ईमान को पाओगे हवालातों में

आज के दौर के इंसान की तारीफ़ करो
जो जिया करता है बिगड़े हुए हालातों में

आप दुश्मन क्यों तलाशें कहीं बाहर जाकर
सारे मौजूद जब अपने ही रिश्ते नातों में

सबसे दिलचस्प घड़ी पहले मिलन की होती
फिर तो दोहराव है बाकी की मुलाक़ातों में

गीत भँवरों के सुनो किससे कहूँ मैं नीरज
जिसको देखूँ वो है मशगूल बही खातों में

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चोटों पे चोट देते ही..

चोटों पे चोट देते ही जाने का शुक्रिया
पत्थर को बुत की शक्ल में लाने का शुक्रिया

जागा रहा तो मैंने नए काम कर लिए
ऐ नींद आज तेरे न आने का शुक्रिया

सूखा पुराना जख्म नए को जगह मिली
स्वागत नए का और पुराने का शुक्रिया

आती न तुम तो क्यों मैं बनाता ये सीढ़ियाँ
दीवारों, मेरी राह में आने का शुक्रिया

आँसू-सा माँ की गोद में आकर सिमट गया
नजरों से अपनी मुझको गिराने का शुक्रिया

अब यह हुआ कि दुनिया ही लगती है मुझको घर
यूँ मेरे घर में आग लगाने का शुक्रिया

गम मिलते हैं तो और निखरती है शायरी
यह बात है तो सारे जमाने का शुक्रिया

अब मुझको आ गए हैं मनाने के सब हुनर
यूँ मुझसे `कुँअर’ रूठ के जाने का शुक्रिया

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मुम्बई को अपना...

मुम्बई को अपना कहने वाले नज़र क्यों नहीं आते हैं !
मुम्बई के दुश्मनों से अब वो क्यों नहीं टकराते हैं !!

क्या ताज, ओबेराय, मरीन हाउस, मुम्बई में नहीं हैं !
या फिर मुम्बई के ठेकेदार अपनी मौत से घबराते हैं !!

दुसरे प्रान्त का कह कर अपने ही लोगों को मारते हैं !
वही दुसरे प्रान्त के लोग मुम्बई पर जान को लुटाते हैं !!

अपने ही देश के लोग जब तिनके की तरह रहते हैं !
वो जरा से वार से लकड़ी की तरह टूट कर बिखर जाते हैं !!

शर्म भी नहीं आती हैं इस देश के निकम्मे नेताओ को !
कहते हैं बड़े - बड़े शहरो में छोटे हादसे हो ही जाते हैं !!

मुम्बई की जंग में शहीद तो बहुत जवान हुए मगर !
शहर में सिर्फ चंद शहीदों के ही फोटो लगाए जाते हैं !!

जो दुश्मन हमारे देश पर करते हैं छुप कर वार !
हमारे नेता उन्ही को दावत पर इज्जत से बुलाते हैं !!

सुनलो सभी नेताओ जब जनता जाग जाती हैं !
तब कुर्सी खुद - ब - खुद निचे भाग जाती हैं !!

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ना ज़मीन, ना सितारे, ना..

ना ज़मीन, ना सितारे, ना चाँद, ना रात चाहिए,
दिल मे मेरे, बसने वाला किसी दोस्त का प्यार चाहिए,

ना दुआ, ना खुदा, ना हाथों मे कोई तलवार चाहिए,
मुसीबत मे किसी एक प्यारे साथी का हाथों मे हाथ चाहिए,

कहूँ ना मै कुछ, समझ जाए वो सब कुछ,
दिल मे उस के, अपने लिए ऐसे जज़्बात चाहिए,

उस दोस्त के चोट लगने पर हम भी दो आँसू बहाने का हक़ रखें,
और हमारे उन आँसुओं को पोंछने वाला उसी का रूमाल चाहिए,

मैं तो तैयार हूँ हर तूफान को तैर कर पार करने के लिए,
बस साहिल पर इन्तज़ार करता हुआ एक सच्चा दिलदार चाहिए,

उलझ सी जाती है ज़िन्दगी की किश्ती दुनिया की बीच मँझदार मे,
इस भँवर से पार उतारने के लिए किसी के नाम की पतवार चाहिए,

अकेले कोई भी सफर काटना मुश्किल हो जाता है,
मुझे भी इस लम्बे रास्ते पर एक अदद हमसफर चाहिए,

यूँ तो ‘मित्र’ का तमग़ा अपने नाम के साथ लगा कर घूमता हूँ,
पर कोई, जो कहे सच्चे मन से अपना दोस्त, ऐसा एक दोस्त चाहिए,

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वो मेरा ही काम करेंगे..

वो मेरा ही काम करेंगे
जब मुझको बदनाम करेंगे

अपने ऐब छुपाने को वो
मेरे क़िस्से आम करेंगे

क्यों अपने सर तोहमत लूं मैं
वो होगा जो राम करेंगे

दीवारों पर खून छिड़क कर
हाक़िम अपना नाम करेंगे

हैं जिनके किरदार अधूरे
दूने अपने दाम करेंगे

अपनी नींदें पूरी करके
मेरी नींद हराम करेंगे

जिस दिन मेरी प्यास मरेगी
मेरे हवाले जाम करेंगे

कल कर लेंगे कल कर लेंगे
यूँ हम उम्र तमाम करेंगे

सोच-सोच कर उम्र बिता दी
कोई अच्छा काम करेंगे

कोई अच्छा काम करेंगे
खुदको फिर बदनाम करेंगे !!

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तेरा हँसना कमाल था..

तेरा हँसना कमाल था साथी
हमको तुमपर मलाल था साथी

दाग चेहरे पे दे गया वो हमें
हमने समझा गुलाल था साथी

रात में आए तेरे ही सपने
दिन में तेरा ख्याल था साथी

उड़ गई नींद मेरी रातों की
तेरा कैसा सवाल था साथी

करने बैठे थे दिल का वो सौदा
कोई आया दलाल था साथी

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इल्ज़ाम जमाने के...

इल्ज़ाम जमाने के हम तो हँस के सहेंगे
खामोश रहे हैं ये लब खामोश रहेंगे

तुमने शुरू किया तमाम तुम ही करोगे
हम दिल का मामला ना सरेआम करेंगे

हम बदमिज़ाज ही सही दिल के बुरे नहीं
दिल के बुरे हैं जो हमें बदनाम करेंगे

बदनाम करके हमको बड़ा काम करोगे
शायद जहां में ऊँचा अपना नाम करोगे

हर दम पे ♥जितू♥ उन्हें तो नाम चाहिए
अच्छे से ना मिला तो बुरा काम करेंगे

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कहने को तो कुछ...

कहने को तो कुछ भी कहो स्वीकार नहीं हमको
हम जैसे हैं वैसे ही हैं इन्कार नहीं हमको।

खामोश भी जब हम रहे कमजोर समझा हमको
तोडेंगे मौन अपना देंगे जवाब तुमको……
हम जैसे हैं वैसे ही हैं इन्कार नहीं हमको।

प्रश्नों के कटघरे में घेरा है तुमनें हमको
लेंगे हिसाब इक - इक देना पडेगा तुमको
हम जैसे हैं वैसे ही हैं इन्कार नहीं हमको।

पत्थर भी टूट जाए कोसा है इतना हमको
सभ्यता का पाठ फिर से पढना पडेग़ा तुमको
हम जैसे हैं वैसे ही हैं इन्कार नहीं हमको।

देखी नहीं जाती है सफलता हमारी तुमको
भारी पडी इक नारी दे दी शिकस्त तुमको
हम जैसे हैं वैसे ही हैं इन्कार नहीं हमको।

राज़ मुबारक तुमको ताज़ मुबारक तुमको
बस चाहते हैं इतना दे दो आकाश हमको
हम जैसे हैं वैसे ही हैं इन्कार नहीं हमको।

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Hindi Shayari - हिंदी शायरी - (भाग - 28)

(1) रात को रात का तोफा नहीं देते !
दिल को जजबात का तोफा नहीं देते !!
देने को तो हम आप को चाँद भी दे दे !
मगर चाँद को चाँद का तोफा नहीं देते !!


(2) जिसे दिल दिया वो दिल्ली चली गई !
जिसे प्यार किया वो इटली चली गई !!
दिल ने कहा खुद ख़ुशी कर ले जालिम !
बिजली को हाथ लगाया तो बिजली चली गई !!


(3) तुझसे मिलने की बेताबी का वो अंजाम कैसे भुलादूँ !
तेरे लवो की हँसी और आँखों की जाम कैसे भुलादूँ !!
दिल तो हमारा भी तड़पता हैं तेरा साथ पाने को !
पर इस जहाँ के रश्मो - रिवाज कैसे भुलादूँ !!


(4) चिराग खुशियों के कब से बुझाए बैठे हैं !
कब दीदार होगी उनसे हम आश लगाए बैठे हैं !!
हमें मौत आएगी उनकी ही बाहों में ......
हम मौत से ये सर्त लगाए बैठे हैं !!


(5) आंसू से पलके भींगा लेता था !
याद तेरी आती थी तो रो लेता था !!
सोचा था की भुला दूँ तुझको मगर !
हर बार ये फैसला बदल लेता था !!

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Hindi Shayari - हिंदी शायरी - (भाग - 27)

(1) वो वक्त वो लम्हे अजीब होंगे !
दुनियाँ में हम खुश नशीब होंगे !!
दूर से जब इतना याद करते हैं आपको !
क्या हाल होगा जब आप हमारे करीब होगे !!


(2) दिल में इंतजार की लकीर छोर जायेगे॥
आँखों में यादो की नमी छोर जायेगे !
ढूंढ़ते फिरोगे हमें एक दिन ........
जिन्दगी में एक दोस्त की कमी छोर जायेगे !!


(3) जिंदगी के रंग कितने निराले हैं !
साथ देने वाला हर कोई है लेकिन हम अकेले हैं !!
पानी है मंजिल हमें मगर रास्तों में रुकावटे हैं !
खुशियों में सब साथ हैं, गमों में सब पराये हैं!!


(4) हर कोई साथ हो ये जरुरी नहीं होता !
जगह तो दिल में बनायीं जाती हैं !!
पास होकर भी दोस्ती इतनी अटूट नहीं होती !
जितनी की दूर रह कर निभाई जाती हैं !!


(5) हम तो यु ही बेखुदी में कह दिए !
की हमें कोई याद नहीं करते !!
जिसका हो आप जैसा प्यारा दोस्त!
वो कभी खुदा से भी फरियाद नहीं करते !!

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Hindi Shayari - हिंदी शायरी - (भाग - 26)

(1) एय मेरी जिन्दगी यूँ मुझसे दगा ना कर !
उसे भुला कर जिन्दा रहू दुआ ना कर !!
कोई उसे देखता हैं तो होती हैं तकलीफ !
एय हवा तू भी उसे छुवा ना कर .... !!


(2) उनकी तस्वीर को सिने से लगा लेते हैं !
इस तरह जुदाई का गम मिटा देते हैं !!
किसी तरह कभी उनका जिक्र हो जाये तो !
भींगी पलकों को हम झुका लेते हैं !!


(3) दोस्त कह कर दोस्त से दगा कर बैठा !
वो आज एक ऐसा खता कर बैठा !!
कहता था तुझे कभी हम खपा ना होने देगे !
आज वो खुद ही हमें खपा कर बैठा !!
आदत थी उसे सबोके गमो को दूर करने की लेकिन !
हमारे लिए ही वो गमो की दुआ कर बैठा !!


(4) हर बार मुझे जख्म ए दिल ना दिया कर !
तू मेरी नहीं तो मुझे दिखाई ना दिया कर !!
सच-झूठ तेरी आँखों से हो जाता हैं जाहिर !
क़समें ना खा, इतनी सफाई ना दिया कर !!


(5) उनका हाल भी कुछ आप जैसा ही होगा !
आपका हाले दिल उन्हें भी महसूस होगा !!
बेकरारी के आग में जो जल रहे हैं आप !
आपसे ज्यादा उन्हें इस जलन का एहसास होगा !!

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Hindi Shayari - हिंदी शायरी - (भाग - 25)

(१) आंसू से पलके भींगा लेता था !
याद तेरी आती थी तो रो लेता था !!
सोचा था की भुला दूँ तुझको मगर !
हर बार ये फैसला बदल लेता था !!


(2) हर वक्त मुस्कुराना फिदरत हैं हमारी !
आप यूँ ही खुश रहे हसरत हैं हमारी !!
आपको हम याद आये या ना आये !
आपको याद करना आदत हैं हमारी !!

(3) हम वो नहीं की भूल जाया करते हैं !
हम वो नहीं जो निभाया करते हैं !!
दूर रहकर मिलना सायद मुस्किल हो !
पर याद करके सांसो में बस जाया करते हैं !!


(4) रात गुमसुम हैं मगर चाँद खामोश नहीं !
कैसे कह दूँ फिर आज मुझे होश नहीं !!
ऐसे डूबा तेरी आँखों के गहराई में आज !
हाथ में जाम हैं,मगर पिने का होश नहीं !!


(5) दिन तेरे ख़याल में गुजर जाता हैं !
रातों को भी ख़याल तेरा ही आता हैं !!
कभी ये ख़याल इस तरह बढ़ जाता है की !
आयने में भी तेरा ही चेहरा नज़र आता हैं !!

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शक्ल हो बस आदमी का...

शक्ल हो बस आदमी का क्या यही पहचान है।
ढूँढ़ता हूँ दर-ब-दर मिलता नहीं इन्सान है।।

घाव छोटा या बडा एहसास दर्द का एक है।
दर्द एक दूजे का बाँटें तो यही एहसान है।।

अपनी मस्ती राग अपना जी लिए तो क्या जीए।
जिंदगी, उनको जगाना हक से भी अनजान है।।

लूटकर खुशियाँ हमारी अब हँसी वे बेचते।
दीख रहा, वो व्यावसायिक झूठी सी मुस्कान है।।

हार के भी अब जितमोहन का हार की चाहत उन्हें।
ताज काँटों का न छूटे बस यही अरमान है।।

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यह सोचते ही सोचते...

यह सोचते ही सोचते सब उम्र पूरी हो गई।
इंसान की मुस्कान क्यों आधी-अधूरी हो गई।।

देखिए हर भाल पर चिन्ता की रेखा खिंच रहीं।
नफरत के उपवन सिंच रहे और नागफनियॉं खिल रहीं।।
इंसान से इंसान की अब क्यों है दूरी हो गई।
यह सेचते ही सोचते....

कुछ तृस्त हैं कुछ भ्रष्ट हैं कुछ भ्रष्टता की ओर हैं।
हो रहीं गमगीन संध्यायें सिसकती भोर हैं।।
वह सुहागिन मॉंग क्यों कर बिन सिंदूरी हो गई।।
यह सोचते ही सोचते....

इंसान पशुता पर उतारू हो रहा नैतिक पतन।
यह देख कर मॉं भारती के हो रहे गीले नयन।।
प्रेम की क्यों भावना भी विष धतूरी हो गई।।
यह सोचते ही सोचते....

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ज़िन्दगी बड़ी...

ज़िन्दगी बड़ी नागवार गुज़री है !
क़रार पा के ये, बेकरार गुज़री है !!

गमों की शाम भी आई थी तसल्ली देने !
करीब आके मेरे अश्क़बार गुज़री है !!

शम्मा की लौ में जलने की तमन्ना लेकर !
तड़प - तड़प के सहर बार बार गुज़री है !!

शज़र उदास है,मौसम भी है धुआं - धुआं !
नज़र चुरा के अबके बहार गुज़री है !!

मेरे क़ातिल मेरे मुंसिफ के इशारों पर !
रिहाई मुझसे अब दरकिनार गुज़री है !!

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साँस जाने बोझ कैसे...

साँस जाने बोझ कैसे जीवन का ढोती रही
नयन बिन अश्रु रहे पर ज़िन्दगी रोती रही।

एक नाज़ुक ख्वाब का अन्जाम कुछ ऐसा हुआ
मैं तड़पता रहा इधर वो उस तरफ रोती रही।

भूख , आँसू और गम़ ने उम्र तक पीछा किया
मेहनत के रूख़ पर ज़र्दियाँ , तन पे फटी धोती रही।

उस महल के बिस्तरे पर सोते रहे कुत्ते बिल्लियाँ
धूप में पिछवाड़े एक बच्ची छोटी सोती रही।

आज तो उस माँ ने जैसे तैसे बच्चे सुला दिये
कल की फ़िक्र पर रात भर दामन भिगोती रही।

तंग आकर मुफ़लिसी से खुदखुशी कर ली मगर
दो गज़ कफ़न को लाश उसकी बाट जोहती रही।

`जितमोहन’ बशर की ख्वाहिशों का कद इतना बढ़ गया
ख्व़ाहिशों की भीड़ में कहीं ज़िन्दगी रोती रही।

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वफ़ा रुसवा नहीं करना..

वफ़ा रुसवा नहीं करना
सुनो ऐसा नहीं करना

मैं पहले ही बहु अकेला हु
मुझे और तनहा नहीं करना

जुदाई भी अगर आये
दिल छोटा नहीं करना

बहु मश्रुफ हो जाना
मुझे सोचा नहीं करना

भरोसा भी जरुरी है
मगर साबका नहीं करना

मुकद्दर फिर मुकद्दर है
कभी दावा नहीं करना

जो लिखा है जरुर होगा
कभी शिकवा नहीं करना
मेरी गुजारिश तुमसे है
मुझे आधा नहीं करना

हकीकत है मिलान अपना
इसे सपना नहीं करना

हमे तुम याद रहते हो
हमे भूला नहीं करना

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Hindi Shayari - हिंदी शायरी - (भाग - 24)

(1) सभी को सभी कुछ नही मिलता !
नदी को हर लहर का साहिल नही मिलता !!
ये दिलवालों की दुनियाँ हैं अजीब !
किसी को दिल नही मिलता तो कोई दिल से नही मिलता !!

(2) दिल से तेरा ख्याल न जाए तो मैं क्या करू !
तू ही बता तू याद आए तो मैं क्या करू !!
हसरत तो ये हैं की एक नज़र तुझे देख लूँ !
मगर किश्मत वो लम्हे न लाये तो मैं क्या करू !!

(3) तम्मनाओ से नही तन्हाई से डरते हैं !
प्यार से नही रुसवाई से डरते हैं !!
मिलने की तो बहुत चाहत हैं आपसे !
पर मिलने के बाद जुदाई से डरते हैं !!

(4) प्यासी निगाहों ने हर पल उनका दीदार माँगा !
जैसे अमावस ने हर रात चाँद माँगा !!
आज रूठ गया हैं वो खुदा भी हमसे !
जब हमने अपनी हर दुवा में उनका साथ माँगा !!

(5) दिल करता हैं मेरा की कोई रात ऐसा आए !
देखे जो साथ हमको फिर लौट के ना जाए !!
मैं तुमसे कुछ ना बोलू, तू मुझसे कुछ ना बोले !
खामौसियाँ भी सोचे की ये कौन सी अदा हैं !!

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Hindi Shayari - हिंदी शायरी - (भाग - 23)

(1) दिल जब टूटता हैं तो आवाज़ नही आती !
हर किसी को मोहब्बत रास नही आती !!
ये तो अपने अपने नशीब की बात हैं दोस्त !
कोई भूलता ही नही किसी को याद ही नही आती !!

(2) कुदरत के करिश्मों में अगर रात न होती !
ख्वाबों में भी उन से मुलाकात न होती !!
ये दिल हर एक गम की वजह हैं !
ये दिल ही न होती तो कोई बात न होती !!

(3) फूल बनकर मुस्कुराना जिंदगी हैं !
मुस्कुराके गम भुलाना जिंदगी हैं !!
मिल कर खुश हुवे तो क्या हुवे !
बिना मिले रिश्ते निभाना जिंदगी हैं !!

(4) नज़र चाहती हैं दीदार करना !
दिल चाहता हैं तुमसे बात करना !!
क्या सुनाऊ अपने दिल का आलम !
मेरे नशीब में लिखा सिर्फ़ तेरा इंतजार करना !!

(5) आँखों में आसूँ आ जाते हैं !
फिर भी लबो पे हँसी रखनी परती हैं !!
ये मोहब्बत भी क्या चीज हैं यारो !
जिससे करते हैं उसी से छुपानी परती हैं !!

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Hindi Shayari - हिंदी शायरी - (भाग - 22)

(1) उनका वादा हैं की वो लौट कर आएगी !
इस उम्मीद पर हम जिए जायेगे !!
ये इंतजार भी उन्ही के तरह प्यारा हैं !
कर रहे थे, कर रहे हैं, और किए जायेगे !!

(2) हो सकता हैं हमने अनजाने में कभी आपको रुला दिया !
आपने दुनियाँ के कहने पर हमको भुला दिया !!
हम तो वैसे भी अकेले थे !
क्या हुवा अगर आपने एहसास दिला दिया !!

(3) एक पल का एहसास बनकर आती हो तुम !
दुसरे ही पल खुशबू के तरह उड़ जाती हो तुम !!
जानती हो डर लगता हैं तनहइयो से हमें !
फिर भी तनहा हमें छोड़ जाती हो तुम !!

(4) देख के हमको वो सर झुकाती हैं !
बुला के महफिल में नज़रे चुराती हैं !!
नफरत हैं हमसे तो भी कोई बात नही !
पर गैरों से मिल के दिल क्यो जलाती हैं !!

(5) तुम आए हो जिंदगी में कहानी बनकर !
तुम आए हो जिंदगी में रात की चांदनी बन कर !!
बसा लेते हैं जिंदगी हम आँखों में !
तुम अक्सर निकल जाती हो आँखों से पानी बन कर !

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Hindi Shayari - हिंदी शायरी - (भाग - 21)

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(1) हम नजरो से दूर हैं आँखों से नहीं !
हम ख्वाबो से दूर हैं खयालो से नहीं !!
हम दिल से दूर हैं धड़कनो से नहीं !
हम आपसे दूर हैं आपके यादो से नहीं !!

(2) फूलो का क्या हैं? ये खिलते हैं बिखर जाते हैं !
लोग दुनियाँ में मिलते हैं बिछर जाते हैं !!
मुश्किल होता हैं भूलना उन लोगों को !
आँखों के रास्ते जो दिल में उतर जाते हैं !!

(3) सबसे उसने दोस्ताना बना रखा हैं !
हर किसी को अपना दीवाना बना रखा हैं !!
हर कोई देख लेता हैं उसकी सूरत में अपनी सूरत !
जैसे उसने अपनी सूरत पे कोई आईना लगा रखा हैं !!

(4) ख़ुशी तलास ली मैंने गम के आशियाने में !
अब कोई और क्या देगा मुझे इस ज़माने में !!
कोई किसी के लिए इतना बेरहम न बने !
जितना दुनियां बन गई मुझको सताने में !!

(5) तेरी इस रुख को परखना मुश्किल हैं !
तेरी हर अदा को समझना मुश्किल हैं !!
कही तेरे इस बेरुखी से टूट न जाऊ !
क्योकि अब टूटकर सम्भलना मुश्किल हैं !!

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