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17 जनवरी 2013

Hindi Shayari - हिंदी शायरी - (भाग - 162)

(1) कितना दर्द है दिल में दिखाया नहीं जाता;
गंभीर है किस्सा सुनाया नहीं जाता;
एक बार जी भर के देख लो इस चहेरे को;
क्योंकि बार-बार कफ़न उठाया नहीं जाता!

(2) जो दिल से करीब हो उसे रुसवा नहीं कहते;
यूं अपनी मोहब्बत का तमाशा नहीं करते;
खामोश रहेंगे तो घुटन और बढ़ेगी;
इसलिए अपनों से कोई बात छुपाया नहीं करते!

(3) तेरे लिए खुद को मजबूर कर लिया;
ज़ख्मो को अपने नासूर कर लिया;
मेरे दिल में क्या था ये जाने बिना;
तुने खुद को हमसे कितना दूर कर लिया!

(4) हमने सोचा कि सिर्फ हम ही उन्हें चाहते हैं;
मगर उनके चाहने वालों का तो काफ़िला निकला;
मैंने सोचा कि शिकायत करू खुदा से;
मगर वह भी उनके चाहने वालों में निकला!

(5) वो नजर कहां से लाऊँ, जो तुम्हें भुला दे;
वो दुआ कहां से लाऊँ, जो इस दर्द को मिटा दे;
मिलना तो लिखा होता है तकदीरों में;
पर वो तकदीर ही कहां से लाऊँ, जो हम दोनों को मिला दे!

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Kawal 30 जनवरी 2013 को 9:04 am बजे  

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