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28 जुलाई 2010

कौन-सी फिल्म ? (चुटकुले)

(1) चंपक- मैं तो अपने सारे दोस्तों को भूल गया था। पर एक फिल्म देखी तो सब याद आ गए। रमन- कौन-सी फिल्म?  चंपक- फिल्म कमीने।

(2) रमन- यार! मुझे सुबह-सुबह साँस लेने में मुश्किल होती है..  चमन- मुश्किल तो होगी ही, क्योंकि सुबह-सुबह बाबा राम देव के भगत सारी ऑक्सीजन जो खींच लेते है।

(3) नीता- तुम अपनी माँग में ग्रीन कलर का सिंदूर क्यों लगाती हो? जबकि विवाहित स्त्रियाँ तो अपनी माँग रेड सिंदूर से सजाती है?
सुमन- क्या है... कि मेरे पति रेलवे विभाग में इंजिन ड्राइवर हैं। जब मैं रेड कलर का सिंदूर अपनी माँग में लगा‍ती हूँ तो वे रूक जाते हैं। और जब ग्रीन कलर का सिंदूर लगाती हूँ तो वे मुझे देखकर आगे बढ़ जाते हैं।

(4) पत्नी (गुस्से में दहाड़ कर अपने पति से बोली)- आपका बेटा कभी भी मुझे मॉम कहकर नहीं पुकारता।
पति (हकला कर बोला)- आज उसको घर आने दो। फिर मैं उसको ऐसी सजा दूँगा कि उसका बाप भी तुम्हें देखकर मॉम पुकारने लगेगा।

(5) बस में सफर के दौरान एक व्यक्ति बोल पड़ा- अब तो समाजवाद ही आएगा।
दूसरा तपाक से बोला- नहीं अब तो मार्क्सवाद ही आएगा।
बर्थ वाली सीट पर सोया व्यक्ति बोला- कृपा करके अब इलाहाबाद आएगा तभी बताना।

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18 मई 2010

Hindi Shayari - हिंदी शायरी - (भाग - 36)

(1) रास्ते पे न बैठो हवा तंग करेगी
बीते हुए लम्हों को सदा तंग करेगी।
किसी को न लाओ दिल के करीब इतना
जाने पे उसकी हरेक अदा तंग करेगी।

(2) क्या पता कब, कहाँ से मारेगी
बस, कि मैं जिंदगी से डरता हूँ
मौत का क्या है, एक बार मारेगी

(3) लबों पे आह दिल में दर्द और आँख में पानी है,
मुहब्बत करने वालों की बस इतनी-सी कहानी है।

(4) कैसे कहूँ कि दिल को तेरी आरज़ू नहीं,
ये और बात है कि मेरी किस्मत में तू नहीं।

(5) यूँ तो सारी उम्र गुज़री यार अपनी दरबदर,
हाँ जो तेरे साथ गुज़रा वो सफर अच्छा लगा।

(6) हमारी नींदें भी उड़ चुकी हैं,
सनम भी करवट बदल रहे हैं,
उधर भी जागा है प्यार दिल में,
उधर भी अरमां मचल रहे हैं।

(7) एक लम्हे में कटा उम्र भर का फासला,
मैं अभी आया हूँ तस्वीरें पुरानी देखकर।

(8) ज़िंदगी में मेरी ये हादसा तो होना ही था,
उसे कभी ना कभी तो बेवफा होना ही था।

(9) मंज़र तुम्हारे शहर के जब याद आएँगे,
दिल पर लगेगी चोट मगर मुस्कुराएँगे।

(10) ये सारे शहर में दहशत सी क्यूँ है,
यकीनन कल कोई त्योहार होगा

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