.....

2 सितंबर 2011

Hindi Shayari - हिंदी शायरी - (भाग - 143)

(१) कोई मिला ही नहीं जिसको वफ़ा देता !
हर एक ने धोखा दिया किस - किस को सजा देता !!
ये तो हम थे की चुप रह गए वर्ना......!
दास्तान सुनाते तो महफिल को रुला देता !! 
 
(२) वो हमारे कब थे जो बेगाने हो गए !
ज़रा सी बात थी क्या फ़साने हो गए !!
क्या उसे इलज़ाम दे क्या सुनाये हालेदिल !
अब कोई होगा नया हम पुराने हो गए !!
 
(३) तू कही भी रह सर पे तेरा इलज़ाम तो हैं !
तेरे हाथों की लकीर में मेरा नाम तो हैं !!
मुझे अपना बना या न बना ये तेरी मर्जी !
पर तू मेरे नाम से बदनाम तो हैं....!!
 
(४) वक़्त की रफ्तार रुक गई होती !
शरम से आँखे झुक गई होती....!!
अगर दर्द जानती शमा परवाने का !
तो जलने से पहले ही वो बुझ गई होती !!
 
(५) किसी का दर्द जब हद से गुजर जाता हैं !
समंदर का पानी आँखों में उतर आता हैं !!
कोई तो बना लेता हैं रेत पर भी घर....!
किसी का लहरों में सब कुछ बिखर जाता हैं !!

1 Post a Comment:

shayari143 11 जून 2012 को 1:48 pm  

awesome use this to post...pls

https://www.facebook.com/pages/Shayari143/279699155460174

एक टिप्पणी भेजें

  © Shero Shairi. All rights reserved. Blog Design By: Jitmohan Jha (Jitu)

Back to TOP