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8 अप्रैल 2011

Hindi Shayari - हिंदी शायरी - (भाग - 57)

(१) दिल के हर गम को हँस कर उराते चले गए !
राहे वफ़ा में खुद को मिटाते चले गए !!
कुछ इस कदर गुजरी हैं जिंदगी अपनी !
खुद रोए और सब को हँसाते चले गए !!

(२) जिंदगी का और कुछ न इरादा हैं !
बस तेरा साथ देने का वादा हैं !!
साथ तुम हो तो सबकुछ मेरा हैं !
वर्ना जिंदगी जीने का मकसद अधुरा हैं !!

(३) ऐसा भी हो कभी उनसे मिला दे कोई !
कैसे हैं वो इतना तो बता दे कोई !!
वो तो खोए हैं अपने ही रंगों की दुनियाँ में !
मेरे दिल का हाल उन्हें बता दे कोई !!

(४) सपनो से दिल लगाने की आदत न रही !
हर वक्त मुश्कुराने की आदत न रही !!
ये सोच के की कोई मनाने नहीं आएगा !
अब हमें रूठ जाने की आदत न रही !!

(५) उस पार ही सही किनारा तो हैं !
टिमटिमाता ही सही सितारा तो हैं !!
हो जाती हैं आपकी यादों से ही तसल्ली !
दूर ही सही कोई हमारा तो हैं !!

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