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16 मई 2011

Hindi Shayari - हिंदी शायरी - (भाग - 105)

(१) अगर वो अपनी मोहब्बत हमें बना ले !
हम उनका हर ख्वाब पलकों पे सजा ले !!
करेगी कैसे मौत हमें उनसे जुदा...!
अगर वो हमें अपनी रूह में बसा ले !!

(२) जिनके तलाश में कदम खुद निकल गए !
जिनकी याद में ये अरमान पिघल गए....!!
ढूंढ़ता था जिनको इस जहाँ में मैं !
पलके बंद की तो वो दिल में ही मिल गए !!

(३) जीने के लिए उनकी मुस्कान काफी हैं !
कलम से लिखी हुई ये दास्तान काफी हैं !!
तस्वीर की क्या जरुरत हैं....!
उन्हें देखने के लिए तो बंद आँखे ही काफी हैं !!

(४) लाजबाब हैं हमारा जीने का फसाना !
कोई सीखे हमसे हर पल मुस्कुराना !!
कोई मेरी हंसी को नज़र न लगादे....!
बरी मुस्किल से सिखा हैं गम छुपा कर मुस्कुराना !!

(५) तोरने के लिए वादा किया नहीं जाता !
सोच समझ कर प्यार किया नहीं जाता !!
यकीन करो प्यार हो या दोस्ती....!
अगर दिल से की हो तो उसके बिना एक पल जिया नहीं जाता !!

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बेनामी,  16 मई 2011 को 6:48 pm  

(३) जीने के लिए उनकी मुस्कान काफी हैं !
कलम से लिखी हुई ये दास्तान काफी हैं !!
तस्वीर की क्या जरुरत हैं....!
उन्हें देखने के लिए तो बंद आँखे ही काफी हैं !!

वीना 16 मई 2011 को 9:24 pm  

१) अगर वो अपनी मोहब्बत हमें बना ले !
हम उनका हर ख्वाब पलकों पे सजा ले !!
करेगी कैसे मौत हमें उनसे जुदा...!
अगर वो हमें अपनी रूह में बसा ले !!

बहुत सुंदर शुरूआत....सुंदर भाव...

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