.....

24 मई 2011

Hindi Shayari - हिंदी शायरी - (भाग - 118)

(१) एक आशियाना जो दिल ने बसाना चाहा !
सारी दुनियाँ ने उसे मिटाना चाहा...!!
वो जाने क्यों हमसे दूर होते चले गए !
जिन्हें हमने सिर्फ अपना बनाना चाहा !!

(२) वो हमसे राह में मिल जाए जरुरी तो नहीं !
खुद बे-खुद फासले मिट जाए जरुरी तो नहीं !!
जिंदगी तुने तो वफ़ा हमसे न की....!
हम अगर तुझे ठुकराए जरुरी तो नहीं !!

(३) आज कह दिया फिर न कहना कभी !
मेरी नज़रों से दूर तुम न रहना कभी !!
ख़ुशी बनकर लबों पे आये हो तुम...!
आंसू बन कर आँखों से न बहना कभी !!

(४) रिश्ता दोस्ती का बनता हैं अगर तक़दीर होती हैं !
बहुत कम लोगो के हाथ में ये लकीर होती हैं !!
जुदा न हो कभी कोई दोस्त किसी का....!
कसम खुदा की बिछरने पर बहुत तकलीफ होती हैं !!

(५) आंसू की बुँदे हैं या आँखों में नमी हैं !
न ऊपर आसमान हैं न निचे जमीन हैं !!
ये कैसा मोड़ हैं जिंदगी का.....!
आपकी ही जरुरत हैं और आपकी ही कमी हैं !!

2 Post a Comment:

वीना 24 मई 2011 को 9:29 pm  

अच्छा दोस्त बहुत तकदीर से मिलता है...
अच्छी रचना...

बेनामी,  23 जुलाई 2011 को 10:13 am  

(१) एक आशियाना जो दिल ने बसाना चाहा !
सारी दुनियाँ ने उसे मिटाना चाहा...!!
वो जाने क्यों हमसे दूर होते चले गए !
जिन्हें हमने सिर्फ अपना बनाना चाहा !!

(२) वो हमसे राह में मिल जाए जरुरी तो नहीं !
खुद बे-खुद फासले मिट जाए जरुरी तो नहीं !!
जिंदगी तुने तो वफ़ा हमसे न की....!
हम अगर तुझे ठुकराए जरुरी तो नहीं !!

(३) आज कह दिया फिर न कहना कभी !
मेरी नज़रों से दूर तुम न रहना कभी !!
ख़ुशी बनकर लबों पे आये हो तुम...!
आंसू बन कर आँखों से न बहना कभी !!

(४) रिश्ता दोस्ती का बनता हैं अगर तक़दीर होती हैं !
बहुत कम लोगो के हाथ में ये लकीर होती हैं !!
जुदा न हो कभी कोई दोस्त किसी का....!
कसम खुदा की बिछरने पर बहुत तकलीफ होती हैं !!

(५) आंसू की बुँदे हैं या आँखों में नमी हैं !
न ऊपर आसमान हैं न निचे जमीन हैं !!
ये कैसा मोड़ हैं जिंदगी का.....!
आपकी ही जरुरत हैं और आपकी ही कमी हैं !!

एक टिप्पणी भेजें

  © Shero Shairi. All rights reserved. Blog Design By: Jitmohan Jha (Jitu)

Back to TOP